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धान की खेती

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धान की खेती हमारे राज्य में मुख्यतः खरीफ मौसम में की जाती है। प्रदेश के उत्तरी पूर्वी क्षेत्रेा में बड़े पैमाने पर बोरो धान की खेती भी हो रही है। पूर्व में प्रचलित गरमा धान की खेती अब काफी कम क्षेत्र में की जा रही है। धान की खेती हमारे यहां भूमि की विभिन्न पारिस्थितिक स्थितियों के अनुरूप की जा रही है। 

धान की बुवाई रोपाई हेतु विधि

  • रोपण विधि :  इस विधि में पौधों को बीचड़ो को बिजस्थली से उखाड़ कर पौध की रोपण करते हैं इस विधि में खेत को कदवा कर तैयार करते हैं और पौध से पौध की दूरी 15 सेंटीमीटर तथा पंक्ति से पंक्ति 20 सेंटीमीटर रखते हैं।
  • (डीसीआर) धान की सीधी बुआई:  मौसम के बदलते परिवेश में जहां कम बारिश एवं श्रमिकों की उपलब्धता कम होती है। वैसी परिस्थितियों में धान की रोपाई विधि को छोड़कर धान की सीधी बुवाई करने का सुझाव दिया जाता है। इस विधि के द्वारा नमी युक्त खेत की जुताई कर धान की बुआई सीड्रिल मशीन के द्वारा की जाती है। जहां सीड्रील मशीन उपलब्ध नहीं हो, वहां छिड़कवा विधि के द्वारा बुआई करें। बुआई के 48 घंटे के अंदर पेंडीमेथिलीन नामक दवा 1 लीटर प्रति एकड़ की दर से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। जिससे खेत में खरपतवार का अंकुरण न हो सके। जैसे-जैसे दवा का असर कम होता जाएगा वैसे-वैसे घास का अंकुरण में वृद्धि होगा। इसके नियंत्रण के लिए बुआई के 20 से 25 दिनों के बीच में घास मारने वाली दूसरी दवा बिस्पायरीबैक सोडियम का 100 एमएल प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर दें। ध्यान रहे इस दवा के छिड़कने के उपरांत अगले दिन / 24 घंटे के अंदर सिंचाई करना जरूरी है। सिंचाई के दिन जहां बिचड़ा घना जमा रहता है वहां से उखाड़ कर कम पौधे वाले जगह पर जमा दें। उसके दो दिन के बाद 20 से 25 किलो यूरिया का परिवेशन कर दें। इसके आगे आवश्यकता अनुसार दूसरी दवा दी जा सकती है। खेतों को बराबर नमी युक्त रहना चाहिए।

उर्वरक का व्यवहार

बीज स्थली में 100 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की बीच / स्थली में निम्नलिखित मात्रा में खाद दें।

  • 1 किलो नेत्रजन, 1 किलो फास्फोरस, 1 किलो पोटाश
  • बीज गिराने के 15 - 20 दिनों बाद 1 किलो नेत्रजन से बिचड़ों की टॉप ड्रेसिंग करें।

खाद की मात्रा

  • ऊपरी जमीन में जलद पकने वाली प्रभेद : 80: 40: 20 किलोग्राम में एन. पि. के / हेक्टेयर
  • उन्नत एवं अधिक उपजशील किस्में : 100 :40 : 20 किलोग्राम एन. पि. के / हेक्टेयर

सुगंधित किस्में

  • बौनी किस्में 80 :40 : 20 किलोग्राम एन. पि. के / हेक्टेयर
  • लम्बी किस्में 40 : 30 : 20 किलोग्राम एन. पि. के / हेक्टेयर
  • संकर किस्में : 120 : 60 : 40 किलोग्राम एन. पि. के / हेक्टेयर

कंपोस्ट खाद का प्रयोग 10 से 15 टन / हेक्टर की दर से रोपाई के 20 - 25 दिन पहले करें।
जिंक सल्फेट 25 किलोग्राम प्रति हेक्टर की दर से मुख्य खेत की अंतिम जुताई के समय एवं कदवा के पूर्व खेत में मिलाये।

नेत्रजन की आधी, स्फुर एवं पोटाश की पूरी मात्रा कदवा के समय तथा एक चौथाई नेत्रजन की मात्रा रोपनी के 20 से 30 दिन के बाद तथा शेष नेत्रजन का बाली निकलने के समय ऊपरीबेशन करें। 150 एवं उससे अधिक अवधि के किस्मेा में नेत्रजन की एक चौथाई मात्रा रोपनी के पहले, दूसरी एक चौथाई रोपनी से 3 से 4 सप्ताह बाद, तीसरी एक चौथाई मात्रा 5 से 6 सप्ताह बाद और अंतिम एक चौथाई मात्रा रोपनी के 7 - 8 के बाद प्रयोग कर सकते हैं।

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खरपतवार प्रबंधन

रोपनी के 40 दिनों तक खेत को खरपतवारों से मुक्त रखें। यांत्रिक विधि से निकाई - गुड़ाई सबसे उत्तम है। 8 - 10 इंच दूरी पर रोपीत धान में कोनोवीडर का प्रयोग करना बहुत फायदेमंद है।

जल प्रबंधन

ध्यान दें, हर समय जल बनाए रखना आवश्यक नहीं है बारी-बारी से खेत में पानी लगाना एवं खेत को हल्का सुखा देने से अधिक कल्ले निकलते है। बाली निकलने से लेकर परिपक्वताव्यवस्था तक खेत में 2 - 3 सेंटीमीटर तक जल बनाए रखें। धान के खेत में दरार न पड़े, उतनी नमी जरूर बनाए रखें।

फसल की कटनी दौंनी एवं भंडारण

धान की कटनी दैनिक परिपक्ता की अवस्था में करनी चाहिए। इस अवस्था में पौधा का तना कुछ हरा ही रहता है तथा बाली का नीचे वाला दाना जोर से दबाने पर चावल निकल जाता है। यह अवस्था पुष्पन के करीब 30 - 35 दिनों बाद आती है। कटनी के समय दानो में 24 प्रतिशत तथा भण्डारण के समय 12 प्रतिशत नमी रहना चाहिए।

धान उत्पादन की नयी तकनीक श्री विधि के 6 मुख्य स्तंभ:

  • 1 8 से 12 दिनों की उम्र का बिचड़ा लगावे। बिचड़ा उखाड़ते समय जड़ों को बिल्कुल न टूटने दे।
  • एकल पौधा लगावें
  • 25 * 25 सेंटीमीटर (10 "* 10") की दूरी पर एक - एक बिचड़ा लाइन में लगावें।
  • 1 एकड़ जमीन में रोपने के लिए 2 किलोग्राम बीज का इस्तेमाल करें।
  • जैविक खादेा का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।
  • हलकी सिंचाई (1 इंच तक) करें तथा खेत में गीला एवं सूखा दोनों स्थिति आने दें।

    इसके अलावा इस विधि में कोनावीडर का प्रयोग करें ताकि खरपतवार नियंत्रण के साथ - साथ खेत को जैविक खाद प्राप्त हो।

धान के प्रमुख कीट एवं रोग तथा प्रबंधन

तना छेदक : मादा किट का अग्र पंख पीलापन लिए हुए होता है, जिसके मध्य भाग में एक काला धब्बा होता है। कीट के पिल्लू तना के अंदर घुसकर मुलायम भाग को खाता है इसके कारण गभ्भा सूख जाता है। बाद की अवस्था में आक्रांत होने पर बालियाँ सफेद हो जाती है, जिसे आसानी से खींचकर बाहर निकाला जा सकता है।
प्रबंधन

  • खेत में 8 - 10 फेरोमौन ट्रैप प्रति हेक्टर लगाए।
  • खेत में बर्ड पचर लगाये।
  • खेत में शाम के समय फंदा लगाये।
  • मित्र कीट की सुरक्षा करें।
  • धान की कटनी जमीन से सटाकर करें।
  • कार्बोफ़्यूरान 3 जी दानेदार 25 किलोग्राम अथवा फोरेट 10 जी 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के दर से खेत की सतह पर व्यवहार करें। ध्यान रखा जाय कि खेत में कीटनाशी व्यवहार के बाद दो-तीन दिनों तक पानी लगा रहे।
  • बिजस्थली में उपरोक्त कीटनाशी का व्यवहार रोपनी के एक सप्ताह पूर्व करना लाभप्रद होगा।
  • विलंब की स्थिति में ऐसीफेट 75% एस. पी. का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।

भूरा तना मधुआ कीट : वयस्क एवं शिशु किट भूरे रंग का होता है, जो पानी की सतह से ऊपर पौधे के निचले भाग पर रहकर तना से निरंतर रस चूसते रहता है। इसके आक्रमण से जगह-जगह पर चटाईनुमा क्षेत्र बन जाता है जो बाद में पीला हो जाता है, जिसे हॉपरबर्न कहते हैं।
प्रबंधन

  • खेत की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें।
  • उचित दूरी पर रोपाई करें।
  • खेत को खरपतवार से मुक्त रखें।
  • कार्बनिक 50 घुलनशील चूर्ण का या एसीफेट 75 घुलनशील चूर्ण का 1. 5 ग्राम प्रति लीटर की दर से पानी में घोल बनाकर पौधे के आधार भाग पर छिड़काव करें।

सांडा किट : किट का शिशु मक्खी के जैसा होता है जिसका पेट गुलाबी रंग का होता है इसके आक्रमण से पर्यावरण प्याज की पत्ती के जैसा हो जाता है, जिसे सूट कहते हैं।
प्रबंधन

  • खेत की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें।
  • खेत को खरपतवार से मुक्त रखें।
  • कार्बोफ़्यूरान 3 जी दानेदार का 25 किलोग्राम प्रति हेक्ट के दर से व्यवहार करें।
  • क़्वीनलफास 25 ईo सीo का 1 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिडकाव करें।

बभनी किट : व्यस्क किट गहरे काले रंग के होते हैं, जो देखने में काली मिर्च जैसा लगता है। व्यस्क कीट पत्ती की हरितिमा को खा जाती है जिससे पतियों पर सामानान्तर सफेद लाइन दिखाई देता है।
प्रबंधन

  • खेत की ग्रीष्मकालीन जुताई करें।
  • खेत को खरपतवार से मुक्त रखें
  • साइपरमेथ्रिन 10 ईo सीo या फ़ेनवेलरेट 20 ईo सीo का 1 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।

बकया किट : मादा कीट सफेद रंग की छोटी आकार की होती है। पिल्लू पती की ऊपरी भाग को काटकर दोनों किनारे को जोड़कर नाली बनाता है, तथा उसके अंदर प्रवेश कर पतियों की हरियाली को खा जाता है।
प्रबंधन

  • खेत की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें।
  • खेत को खरपतवार से मुक्त रखें।
  • लंबे रस्सी के दोनों किनारो को पड़कर धान के खेत की फसल पर खींच कर अस्तिरता पैदा करें, जिससे पिल्लू बाहर निकल जाए।
  • कार्टैप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी दानेदार 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में व्यबहार करें। ।

पत्र लपेटक : मादा कीट सुनहरे रंग की होती है। पिल्लू पतियों के दोनों किनारे को रेशमी धागे से जोड़कर उसके अंदर रहते हैं। यह कीट पतियों की हरीतीमा को खाता है।
प्रबंधन

  • खेत की ग्रीष्मकालीन जुताई करें।
  • मित्र किट का संरक्षण करें।
  • कार्टैप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी दानेदार 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में व्यबहार करें।
  • इमिडाक्लोप्रिड 17. 8 एसo एलo का 1 मिलीलीटर / 3 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

गंधी कीट : यह भूरे रंग का लम्बी टांगों वाला दुर्गंधयुक्त कीट है। शिशु एवं व्यसक कीट दुग्धावस्था में धान के दानों में छेदकर उसका दूध चूस लेते हैं , जिसेसे धान खखरी में बदल जाती है।
प्रबंधन

  • मृत मेढक / केकड़ा को सूती कपडे को पोटली में बांधकर प्रति हेक्टेयर 10 - 20 जगह खेत के चारों तरफ लटका दें।
  • मिथाइल पैराथियोन 2 प्रतिशत धूल या मेलाथियान 5 प्रतिशत धूल का 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह में भुरकाव करें।

सैनिक कीट : व्यसक कीट मोटा तथा भूरे रंग का होता है, जिसके अग्र पंख पर काले धब्बे होते हैं। पिल्लू शाम में निकलकर पतियों को खाता है। यह दिन में मिट्टी के दरार में छिप जाता है।
प्रबंधन

  • खेत को साफ रखें।
  • मेड़ को साफ - सुथरा रखें।
  • खेत में बर्थ पर्चर लगाए।
  • मिथाइल पैराथियोन 2 प्रतिशत धूल का 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से शाम में भुरकाव करें।

धान का झोंका रोग :  पतियों पर आँख या नाव के आकार के धब्बे बनते हैं। जिसके बीच का भाग राख के रंग का हो जाता हैं जिससे पतियाँ झूलस जाती है।गाँठो पर भी काला - भूरा धब्बा बन जाता है, जो हवा के हल्के झोकों से टूट कर गिर जाता है। रोग का आक्रमण बाली के नीचे ग्रीवा पर होने से प्रभावित बाली में दाना नहीं बनता है।प्रबंधन

  • खेत की ग्रीष्मकालीन जुताई करें।
  • कार्बेन्डाजिम 50 घुलनशील चूर्ण का 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित का बोआई करें।
  • खेत को खर -पतवार से मुक्त रखें।
  • कार्बेन्डाजिम 50 घुलनशील चूर्ण का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें, अथवा प्रोपिकोनाज़ोल 25 ईo सीo का 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।

पत्र अंगमारी रोग : इस रोग में पत्तियाँ शीर्ष से दोनों किनारे या एक किनारे से सूखती हैं।
प्रबन्धन

  • खेत में जमा पानी को निकाल दें।
  • उर्वरकों का संतुलित व्यवहार करें। नेत्रजनीय उर्वरक का ज्यादा व्यवहार नहीं करें।
  • स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 50 ग्राम + कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 50 घुलनशील चूर्ण का 2.5 किलोग्राम प्रति हेक्टर की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।

सीथ बलाइट : पत्रावरण पर हरे भरे रंग के अनियमित आकार के धब्बे बनते हैं जो देखने में सर्प के केंचुल जैसे लगते हैं।
प्रबंधन

  • रोग-रोधी किस्म लगाएं।
  • फसल चक्र अपनाए।
  • खेत में जल निकास का उत्तम प्रबंध करें।
  • ट्राईकोडरमा जैविक कीटनाशी के 5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार करें।
  • कार्बेन्डाजिम 50 घुलनशील चूर्ण का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।
  • भैलिडामाइसिन 3 एलo अथवा हेक्साकोनाज़ोल 5 ईo सीo का 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर प्रभावित पौधे पर छिड़काव करें।

सीथ रॉट : पत्रावरण परअनियमित आकार के भूरे - काले धब्बे बनते हैं, जिसके कारण बाली पत्रावरण के अंदर ही सड़ जाती है।
प्रबंधन

  • रोग - रोधी प्रभेद की बुआई करें।
  • कार्बेन्डाजिम 50 घुलनशील चूर्ण का 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार कर बुआई करें।
  • मैन्कोज़ेब 75 घुलनशील चूर्ण का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव

पत्रलांछन (भूरा धब्बा) : पत्तियों में टिकुली के सके मान जहां - तहाँ भूरे रंग की चित्ती बन जाती है। रोग का आक्रमण बढ़ने पर कई धब्बे आपस में मिलकर पूरी पत्ती पर फैल जाते हैं।
प्रबंधन

  • प्सिंचाई की समुचित व्यवस्था करें।
  • प्सिंचाई की समुचित व्यवस्था करें।
  • प्रतिरोधी किस्म के बीच को लगाए।
  • कार्बेन्डाजिम 50 घुलनशील चूर्ण का 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार कर बुआई करें।
  • मैन्कोज़ेब 75 घुलनशील चूर्ण का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

फाल्स स्मट : बाली निकलने के समय कुछ दाने गोल बड़े आकार के मखमली हरे - पीले रंग के हो जाते हैं जो बाद में काले पड़ जाते हैं।
प्रबंधन

  • खेत को खर -पतवार से मुक्त रखें।
  • खेत को खर -पतवार से मुक्त रखें।
  • कार्बेन्डाजिम 50 घुलनशील चूर्ण का 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार कर बुआई करें।
  • बाली निकलने के समय मैन्कोज़ेब 75 घुलनशील चूर्ण का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।
  • फसल के पुष्पम के पूर्व प्रोपिकोनाज़ोल 25 ईo सीo का 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव फायदेमंद रहता है।

धान की खेती का खर्च एवं आय प्रति हेक्टर का ब्योरा

बीज, बिचड़, उगाने खेत की तैयारी
वर्मी कंपोस्ट इत्यादि, खेत का कदवा करने का खर्च
उर्वरक, वर्मी कंपोस्ट इत्यादि
बिचड़ा उखाड़ने एवं रोपाई मजदूरी
कोनो वीडर का मजदूरी
पटवन
पौधा संरक्षण
कटाई मढ़ाई
कुल खर्च

1600.00 रुपए
4500.00 रुपए
4850.00 रुपए
6000.00 रुपए
2500.00 रुपए
7500.00 रुपए
2000.00 रुपए
5500.00 रुपए
34450.00 रुपए

ऊपज = 70 क्विंटल दर 1100 / क्विंटल = 77000 रुपए
शुध्द आय = 77000 - 34450 = 42550 रुपए

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