पुआल मशरूम (वोल्वेरिएला वोल्वेसिया) जिसे चाईनीज मशरूम तथा पैडी स्ट्रा मशरूम के नाम से भी जाना जाता है। यह उपोषण तथा उष्ण कटिबंध भाग की तेजी से उगने वाली मशरूम है तथा अनुकूल उत्पादन परिस्थितियों में इसका एक फसल चक्र 4 से 5 सप्ताह में पूर्ण हो जाता है। इस के उत्पादन हेतु विभिन्न प्रकार के सेलुलोज युक्त पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है तथा इन पदार्थों में कार्बन व नाईट्रोजन के 40 से 60 1 अनुपात की आवश्यकता होती है, जो अन्य मशरूमों के उत्पादन की तुलना में बहुत उच्च है। इस मशरूम को बहुत से अविघटित माध्यमों (पोषाधारों) पर उगाया जा सकता है जैसे धान का पुआल, कपास उद्योग से बचा अवशेष, गन्ने की खोई तथा अन्य सेलुलोज युक्त जैविक पदार्थ।
पौष्टिक गुण :
इस मशरूम की पौष्टिक गुणवत्ता, फसल उगाने के तरीके तथा विभिन्न परिपक्व अवस्थाओं से प्रभावित होती है। उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि मशरूम के सुखे भार के आधार पर, इसमें कच्चा प्रोटीन 30.43 प्रतिशत, वसा 1.6 प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट्स 12.48 प्रतिशत, कच्चा रेशा 4.10 प्रतिशत तथा राख 5.13 प्रतिशत पोषक तत्व पाये जाते है। पुआल मशरूम में खनिज जैसे पोटेशियम, सोडियम तथा फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाये जाते है। इस मशरूम में थाईमिन तथा राइबोफ्लेविन का स्थर बटन मशरूम (एगेरिकस बाईस्पोरस) तथा शिटाके मशरूम (लेन्टिनुला इडोड्स) की अपेक्षा कम होता है, जबकि नियासिन इन दोनों के समान मात्रा में हो जाती है। पुआल मशरूम में आवश्यक अमीनों अम्ल की प्रतिशत अन्य मशरूमों की तुलना में उच्च होती है तथा लाईसीन की प्रचुरता अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
उत्पादन तकनीक :
पुआल मशरूम की खेती के लिए विभिन्न प्रकार के व्यर्थ पदार्थ इस्तेमाल किये जाते हैं जिसमें प्रमुख हैं धान का पुआल, जल कुम्भी, केले के पत्ते तथा लकड़ी का बुरादा एवंगन्ने की खोई इत्यादि। पुआल मशरूम की खेती कम जटिल तथा कम व्यापक है। पुआल मशरूम निम्नलिखित विधियों द्वारा उगाई जा सकती है।
(क) पारंपरिक विधि :
इस विधि में निम्नलिखित चरण शामिल हैं一
कक्ष में उचित आर्द्रता बनाये रखने के लिए बहुत महीन फुहासे का ही उपयोग किया जाना चाहिए। शैय्या में नमी कम होने पर उस पर बहुत ही महीन फुहासे के रूप में पानी का छिड़काव करना चाहिए। कक्ष के अन्दर अनुकूल तापमान तथा वातावरण बनाये रखने के लिए संशोधन की जरूरत होती है।
(ख) केज विधि :
आवश्यक सामग्री
उत्पादन विधि :
फलन तथा फसल प्रबंधन :
स्पॉन फैलने की अवधि के दौरान पानी तथा प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती है परन्तु थोड़ी ताजी हवा के संचार की आवश्यकता होती है। तीन से चार दिनों के पाश्चात्, कमरों में हल्का प्रकाश तथा ताजी हवा दी जाती है। चार से पाँच दिनों के पश्चात् सीट को हटाया जाता है तथा बैडों पर पानी का हल्का छिड़काव किया जाता है। बीजाई के 5-6 दिनों के पश्चात् मशरूम कलिकाएँ (पिन हेडस) निकलनी शुरू हो जाती है। अगले 4 से 5 दिनों के पश्चात् मशरूम की पहली फसल तुड़ाई योग्य हो जाती है। अच्छे फलन के लिए कक्ष में आवश्यक तापमान 28 से 32 डिग्री सेल्सियस, आर्द्रता 80 प्रतिशत, हल्का प्रकाश तथा ताजी हवा का संचार होना चाहिए।
तुड़ाई :
पुआल मशरूम की तुड़ाई झिल्ली फटने से पहले या फिर फटने के तुरन्त बाद की जाती है। इन अवस्थाओं को बटन तथा अंडाकार अवस्थाएँ कहते हैं। यह मशरूम उच्च तापमान तथा नमी में उगती है इसलिए इसका विकास तेजी से होती है। उत्तम अनुकूल वातावरण में इस मशरूम की तुड़ाई दिन में दो या तीन बार करनी पड़ती है। (सुबह, दोपहर, अपराहन)। इस मशरूम को बीजाई के पश्चात् पहली तुड़ाई तक के लिए साधारणतः 9-10 दिन का समय लगता हैं पहली फसल सामान्यतः 3 दिनों तक चलती है, जिसमें कुल अपेक्षित मशरूम पैदावार का लगभग 70 से 90 प्रतिशत पैदावार होती है। तीन से 5 दिन के अंतराल पर इसमें पूर्ण रूप से पानी की आवश्यकता होती है तथा कमरे के अन्दर अनुकूल परिस्थितियाँ बनाये रखी जाती है।
भण्डारण :
अन्य खाद्य मशरूमों की अपेक्षा पुआल मशरूम जल्दी खराब हो जाती है इसका भण्डारण 4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इस तापमान पर इसका स्वलयन हो जाता है। इस मशरूम का 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 3 दिनों तक भण्डारण किया जा सकता है।
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