रबी मौसम में उगायी जाने वाली तेलहनी फसलों में तोरी एवं सरसों का प्रमुख स्थान है। इनका उपयोग खाद्य तेल एवं जानवरों हेतु खली के रूप में किया जाता है। अधिक एवं गुणवत्तायुक्त उपज प्राप्त करने हेतु यह आवश्यक है कि इसकी खेती वैज्ञानिक ढंग से की जाये ताकि फसल से अधिक से अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सके।
जलवायु : तोरी एवं सरसों ठण्डी एवं नम जलवायु की फसल है। इसलिए इसकी खेती शरद ऋतु में की जाती है।
भूमि : तोरी एवं सरसों फसल की खेती के लिए हल्की मिट्टी से भारी दोमट मिट्टी उपयुक्त पाई गई है। वैसे सभी प्रकार के मिट्टियों में सरसों एवं तोरी की खेती संभव है।
खेत की तैयारी : तोरी एवं सरसों की बुवाई के लिए दो-तीन बार खेत की जुताई करें, साथ ही पाटा चला कर मिट्टी भुरभुरी बनाएं। इसी समय गोबर की सड़ी खाद लगभग 10टन प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में समान रूप से बिखेर कर मिट्टी में मिला दें। अब बुआई योग्य तैयार खेत में सिंचाईनुसार क्यारियों में खेत को बांट लें।
उन्नत प्रभेद
तोरी
पंचाली, आर.ए.यू.टी.एस.-17, पी.टी. 303 एवं भवानी प्रमुख है। इन सभी प्रभेदों की बुवाई 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक की जाती है। पंचाली में तेल की मात्रा 40 प्रतिशत पाई जाती है, उपज 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर फसल 95 से 105 दिन में तैयार हो जाती है। आर.ए.यू.टी.एस.-17 में तेल की मात्रा 43 प्रतिशत, परिपक्वता अवधि 90 से 95 दिन है तथा उत्पादन क्षमता 12 से 15 कुण्टल प्रति हेक्टेयर है। पी.टी. 303 में तेल की मात्रा 43 प्रतिशत, फसल 95 से 100 दिनों में तैयार होती है। इसमें उत्पादन क्षमता 12 से 14 कुण्टल प्रति हेक्टेयर है। भवानी में तेल की मात्रा 41 प्रतिशत पाई जाती है फसल 90 से 95 दिनों में तैयार होती है तथा उत्पादन क्षमता 10 से 12 कुण्टल प्रति हेक्टेयर है।
सरसों
सरसों की उन्नत प्रभेदों में राजेन्द्र सरसों-1, 66-197-3 एवं स्वर्णा प्रमुख है। राजेन्द्र सरसों-1 में तेल की मात्रा 46 प्रतिशत है, 95 से 100 दिनों में फसल तैयार हो जाती है और उत्पादन क्षमता 15 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। 66-197-3 की बुवाई 10 से 20 अक्टूबर तक की जाती है। इसमें तेल की मात्रा 43 प्रतिशत पाई जाती है तथा उत्पादन क्षमता 14 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। स्वर्णा की बुवाई 10 से 20 अक्टूबर के मध्य कर सकते है तेल की मात्रा 47 प्रतिशत है। फसल 110 से 120 दिनों में तैयार होती है और उत्पादन 14 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पाया जाता है।
बीज दर
लगभग 05 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है।
बुवाई का समय
अगात फसल के लिए 10 से 15 अक्टूबर तक बुवाई का समय होता है। समकालीन फसल के लिए 15 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक पिछात फसल के लिए 25 अक्टूबर से 10 नवंबर का समय उपयुक्त होता है।
बीजोपचार : तोरी एवं सरसों के बीज को खेत में बोने से पहले 2 से 3 ग्राम कार्बेन्डाजिम नामक दवा से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित कर लेना चाहिए।
पोषक तत्त्व प्रबंधन : खेत की तैयारी करते समय 10 टन कम्पोस्ट अथवा 2 टन वर्मी कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए तथा रसायनिक उर्वरकों में 60 किग्रा. नेत्रजन, 40 किग्रा. स्फुर एवं 40 किग्रा. पोटाश की आवश्यकता होती है। नेत्रजन की आधी मात्रा तथा स्फुर एवं पोटाश की पूरी मात्रा अंतिम जुताई के समय खेत में मिला दें तथा नेत्रजन की आधी मात्रा फसल में फूल आने के समय उपरिवेशन के रूप में देना चाहिए। साथ ही मिट्टी जाँच के आधार पर गंधक, जिंक एवं बोरान का भी प्रयोग करना चाहिये। असिंचित अवस्था के लिए 30 किग्रा. नेत्रजन, 20 किग्रा. स्फुर, एवं 20 किग्रा. पोटाश का प्रयोग करें।
खरपतवार प्रबंधन : बुवाई के 15-20 दिनों के बाद निकौनी अवश्य कर देनी चाहिए। इससे खेत खरपतवार मुक्त हो जाता हैं साथ ही पौधों की जड़ों के पास प्रकाश एवं हवा ज्यादा प्राप्त होती है। जिससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है। बीज बुवाई के 15 दिनों बाद पौधों की वछनी की आवश्यकता पड़ती है। प्रत्येक पत्तियों में 30×10 से.मी. की दूरी पर एक-एक स्वस्थ पौधों को छोड़कर अन्य सभी पौधों को खेत से निकाल देना चाहिए। कतार में सही दूरी पर पौधों के होने से उपज में वृद्धि होती है।
सिंचाई प्रबंधन : रसों एवं तोरी में दो सिंचाई आवश्यक होती है। पहली सिंचाई फूल लगने के समय तथा दूसरी सिंचाई फलियाँ बनते समय करनी चाहिये। खेत में नमी की कमी होने पर हल्की सिंचाई करनी चाहिये।
पौधा संरक्षण : तोरी एवं सरसों फसल में माहूँ, आरा मक्खी, सफेद हरदा एवं पत्र धब्बा का प्रकोप पाया जाता है जिसके कारण उपज घट जाती है इसलिए निम्न नियंत्रण उपाय अपनाएँ।
फसल की कटाई
लगभग 75 प्रतिशत फलियाँ भूरी-पीली हो जाने पर फसल की कटनी कर लेनी चाहिए।
उपज
विभिन्न प्रभेदों से तोरी में 10 से 15 क्विंटल एवं सरसों में 10 से 16 क्विंटल तक प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है।
खेत तैयारी, बीज एवं बुआई खर्च
पटवन दो सिंचाई
उर्वरक एवं निराई गुड़ाई
पौधा संरक्षण
कटाई एवं मढ़ाई
कुल खर्च
उपज - 14 क्विंटल दर 4200/क्विंटल
शुद्ध आय 58,800 - 19200
58,800.00
39,600.00 प्रति हेक्टर
4400.00
4000.00
4300.00
1500.00
5000.00
19,200.00
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